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ऑपरेशन सिंदूर-विवाद आशंका अब इस बात पर ही टिक गई है कि ६ या ७ या ८ में से सही संख्या क्या थी ?

युद्ध में कम या ज्यादा दोनों ओर का नुकसान होना ही होता है ।हालांकि प्रधानमंत्री रक्षामंत्री को छोड़कर लगभग सभी अब यह निजी या सार्वजनिक रूप से स्वीकारने लगे हैं कि तीन दिन के भारत पाक युद्ध के दूसरे तीसरे दिन भारत के युद्धक विमान नष्ट हुये थे जबकि पहले दिन के भारतीय हमले बेहद सटीक और घातक थे ।
युद्ध में कम या ज्यादा दोनों ओर का नुकसान होना ही होता है । पाकिस्तान जोर जोर से हर मंच पर सात विमान गिराने का दावा करता है जिसे सच नहीं माना जा सकता पर अमरीका को पूरी खबर रहती है सच सच और अमरीकी राष्ट्रपति तक कमोबेश जाँची हुई सच्ची सूचनायें ही पहुँचती है । अभी तक अधिकांश देशों के उच्चस्तरीय अधिकारी सीआईए के सम्पर्क में रहते हैं । वायु सेनाध्यक्ष व सीडीएस ने कभी भी साफ़ साफ़ मना नहीं किया कि भारतीय विमान नहीं गिरे । जब हमारे सबसे आधुनिक और महंगे राफेल विमान नष्ट हुये तो यह उचित ही था कि सरकार युद्धविराम कर अपनी शक्ति का पुनर्मूल्यांकन करे और आगे के लिये मुकम्मिल तैयारी करे । यह भी बुरा नहीं है कि अस्थायी सामरिक विफलता का ढोल हम क्यों पीटे जबकि सदैव ही पाकिस्तान को हमने पूर्व में बुरी तरह हराया था । यह भी रहस्य नहीं बचा कि चीन ने पाकिस्तान की ओर से लगभग पूरा युद्ध लड़ा था जो टैक्नोलॉजी में हमसे बहुत आगे है और लगातार आगे बढ़ता जा रहा है । विज्ञान आधारित शिक्षा , तकनीकी आविष्कार व नवाचार में चीन कुछ ही समय में अमरीका को सशक्त चुनौती देने को तैयार बैठा है और वह युग दूर नहीं जबकि विश्व यह सम्भावना देख रहा है कि चीन और अमरीका ध्रुवों में यह दुनिया बंट जायेगी । रूस ब्राज़ील ईरान समेत अनेक सामरिक महत्व के छोटे मध्यम देश चीन के पीछे आ सकते हैं। चीन की नीति पिछले पचास बरसों से युद्ध न करने की है । उसकी दृष्टि एकाग्र है और वह अपनी ताक़त को बढ़ाता जा रहा है हर क्षेत्र में ।
भारत दिशा भटक गया है जो जनसमर्थन नई सरकार को मिला उसका चौतरफा उपयोग राष्ट्र निर्माण में न करते हुये महज़ चुनाव में इस्तेमाल करने की अल्पकालिक दृष्टि के कारण १२ बरस अनुपयोगी साबित हो चुके हैं। प्रचार और सिर्फ़ प्रचार बहुत दूर तक कारगर नहीं होता । सही तथ्य आजकल किसी से भी छिपाये नहीं जा सकते हैं।
राष्ट्रपति ट्रम्प कम से कम पचास बार कह चुके हैं कि उन्होनें ही भारत पाक युद्ध रुकवाया अन्यथा वह आणविक युद्ध में बदल सकता था । भारत
सरकार ने इसका जोरदार खंडन कभी नहीं किया । अब तो फ्रैंड दोलांड ट्रम्प लगातार भारत के खिलाफ विषवमन करने लगा है । समय आ गया है जबकि अमरीका का ब्लफ एक न एक दिन हमें तोडना ही पडेगा । फिलिस्तीन वेनेजुएला के बाद अमरीकी खूनी पंजा ईरान की ओर बढ़ता दिख रहा है । ा
पाकिस्तान के साथ पिछले युद्ध को अतीत की एक रणनीतिक चूक मानकर हमें कभी तो गंभीरता से हालात को आंक कर सही दीर्घकालिक निर्णय लेने होंगें अन्यथा चुनाव जीत कर कई आये कई चले गये !