Headlines

वीर तुम अड़े रहो, रजाई में पड़े रहो

वीर तुम अड़े रहो, रजाई में पड़े रहो ठंड ही ठंड है, यह बड़ी प्रचंड है, कक्ष शीत से भरा, बर्फ से ढकी धरा, यत्न कर संभाल लो, ये समय निकाल लो,, वीर तुम अड़े रहो, रजाई में पड़े रहो। चाय का मजा रहे, पकौड़ा दल सजा रहे, मुंह कभी थके नहीं, रजाई भी हटे…

Read More

आम भारतीय स्त्री

मनमीत सोनी मुझे मंदी आंच पर सीझ रही ठीक-ठाक मसाले के छौक वाली पतली स्वादिष्ट दाल का ख़याल आता है – जिसमें एक बार रोटी डुबा ली तो आप तीन के बजाय पांच फुलके खा जाएंगे और अगर चावल मिला लिए तो पेट तो भर जाएगा मगर जीभ पुकारेगी : बस एक निवाला और! —…

Read More