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जीवन से हारे मेरे पुरुष मित्रों

जीवन से हारे मेरे पुरुष मित्रों। दुनिया सफल पुरुषों की बात करती है और सफल पुरुषों की आत्मप्रवंचना अभिप्रेरणा बना कर बेची जाती है। मैं तुम्हारी बात करूंगा, मित्रों, जीवन ने जिन्हें किश्तों में दिया जीवन, और एक-एक किश्त पर वसूला चक्रवृद्धि ब्याज जीवन से हारे मेरे पुरुष मित्रों, पुरुष जीवन की एक ही परीक्षा…

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शूद्र का आटा, शूद्र का घी,भोग लगावे पंडित जी

शूद्र का आटा, शूद्र का घी, भोग लगाएं पंडित जी… शूद्र बेचारे दान चढावैं, मौज मनावैं पंडित जी.. पैदा हो जब शूद्र के बेटा, नाम धरावैं पंडित जी… आरक्षण से मिलल, नौकरी, मनौती पुरावैं पंडित जी.. खेत बेंच मन्दिर बनवावैं, पुजारी बनिगैं पंडित जी.. . शूद्रन के चपरासी बनवावैं, हाकिम बनिगै पन्डित जी… कर्जा लेके…

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मन के नंगे अँधियारे में, स्वाद बदलने आते हैं

देह बेचतीं हम वैश्याएँ, पुरुष मचलने आते हैं। मन के नंगे अँधियारे में, स्वाद बदलने आते हैं॥ यूँ तो हम भी नहीं रूपसी, केवल काम उतारू हैं। किसे विवशता ज्ञात हमारी, क्यों ऐसी बाजारू हैं॥ जगत हमें झूठा गरियाता, चेहरे नहीं छिपातीं हम। देह वही बस रूप अलग है, पुरुषों को भरमातीं हम॥ जग का…

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वीर तुम अड़े रहो, रजाई में पड़े रहो

वीर तुम अड़े रहो, रजाई में पड़े रहो ठंड ही ठंड है, यह बड़ी प्रचंड है, कक्ष शीत से भरा, बर्फ से ढकी धरा, यत्न कर संभाल लो, ये समय निकाल लो,, वीर तुम अड़े रहो, रजाई में पड़े रहो। चाय का मजा रहे, पकौड़ा दल सजा रहे, मुंह कभी थके नहीं, रजाई भी हटे…

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आम भारतीय स्त्री

मनमीत सोनी मुझे मंदी आंच पर सीझ रही ठीक-ठाक मसाले के छौक वाली पतली स्वादिष्ट दाल का ख़याल आता है – जिसमें एक बार रोटी डुबा ली तो आप तीन के बजाय पांच फुलके खा जाएंगे और अगर चावल मिला लिए तो पेट तो भर जाएगा मगर जीभ पुकारेगी : बस एक निवाला और! —…

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