वीर तुम अड़े रहो, रजाई में पड़े रहो
वीर तुम अड़े रहो, रजाई में पड़े रहो ठंड ही ठंड है, यह बड़ी प्रचंड है, कक्ष शीत से भरा, बर्फ से ढकी धरा, यत्न कर संभाल लो, ये समय निकाल लो,, वीर तुम अड़े रहो, रजाई में पड़े रहो। चाय का मजा रहे, पकौड़ा दल सजा रहे, मुंह कभी थके नहीं, रजाई भी हटे…

