शूद्र का आटा, शूद्र का घी,
भोग लगाएं पंडित जी…
शूद्र बेचारे दान चढावैं,
मौज मनावैं पंडित जी..
पैदा हो जब शूद्र के बेटा,
नाम धरावैं पंडित जी…
आरक्षण से मिलल, नौकरी,
मनौती पुरावैं पंडित जी..
खेत बेंच मन्दिर बनवावैं,
पुजारी बनिगैं पंडित जी..
. शूद्रन के चपरासी बनवावैं,
हाकिम बनिगै पन्डित जी…
कर्जा लेके घर बनावैं,
हवन करावैं पंडित जी
मां-बाप को गाली देवें,
पैर दबवावें पंडित जी…
बाप के तेरहीं में खेत बिकल,
पूड़ी खावें पंडित जी…
माई के तेरहीं में घरवो बिकी गै,
गौदान करावैं पन्डित जी..
शूद्र जी घूमें मन्दिर तीरथ,
संसद जाएं पंडित जी.
शूद्र क लड़का काँवड़ ढोवै,
दिल्ली पढ़वावैं पन्डित जी..

