प्रदर्शनी से संघ समझने में मिलेगी सहायता : दीक्षित

ग्वालियर30। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को समझने के लिए आद्य सरसंघचालक डॉ.केशव बलिराम हेडगेवार का जीवन जानना और संघ की शाखा में जाना जरूरी है, लेकिन यहां शुरू हुई प्रदर्शनी से भी लोगों को संघ को समझने में सहायता मिलेगी।
यह बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मध्य भारत प्रांत के सह प्रांत कार्यवाह विजय दीक्षित ने शुक्रवार को व्यापार मेला में संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में चित्र-दृश्य प्रदर्शनी के उद्घाटन समारोह में मुख्य वक्ता की आसंदी से कही। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लाल टिपारा गौशाला के संत ऋषभदेवानंद महाराज थे। अध्यक्षता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ग्वालियर विभाग संघचालक प्रहलाद सबनानी ने की। श्री दीक्षित ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्ष की गौरवपूर्ण यात्रा पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि शुरुआती दौर में संघ का उपहास, उपेक्षा और विरोध किया गया, लेकिन समाज और देशहित में सतत कार्य करने से आज गांवों तक लोग संघ के बारे में जानते हैं। महात्मा गांधी भी संघ को जानने के लिए वर्धा में आयोजित संघ कार्यक्रम में गए थे। इसी भावना से रतन टाटा संघ शाखा गए थे। दोनों महापुरुषों ने संघ के ध्येय और कार्य को सराहा था। आज अन्य लोग भी संघ के बारे में जानना चाहते हैं। इस प्रदर्शनी में संघ की स्थापना से लेकर वर्तमान तक के संघ के योगदान, शाखाओं का विस्तार, राष्ट्रसेवा के अनगिनत प्रसंग और सामाजिक कार्यों की झलकियों और वृत्तचित्र से लोगों को संघ के बारे में समझ और बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि संघ निस्वार्थ भाव से समाज और देशहित के कार्यों में निरंतर जुटा हुआ है। इसी वजह से समाज का संघ पर विश्वास बढ़ा है। श्री दीक्षित ने कहा कि कुछ लोग संघ को मुस्लिम विरोधी और हिंदुओं का संगठन कहते हैं, जबकि संघ किसी का विरोधी नहीं है। वह सिर्फ हिंदुओं को सामाजिक समरसता को बढ़ावा देकर संगठित कर रहा है। डॉ.जाकिर हुसैन ने भी माना था संघ किसी का विरोधी नहीं है। उन्होंने कहा कि संघ सामाजिक चेतना को जाग्रत कर रहा है। इन दिनों आयोजित हिंदू सम्मेलनों में पंच परिवर्तन-सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्व बोध, कुटुंब प्रबोधन, नागरिक कर्तव्य आत्मसात करने का आह्वन किया जा रहा है। शताब्दी वर्ष में जनगोष्ठियों के माध्यम से भी लोगों को समाज और देशहित में कार्य करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। श्री दीक्षित ने लोगों से आह्वान किया कि वह इस प्रदर्शनी को रील की तरह तेजी से नहीं, बल्कि धैर्य के साथ देखकर राष्ट्रकार्य में सहभागी बनें। कार्यक्रम का संचालन नरेश त्यागी ने किया।