रमाशंकर सिंह की फेसबुक वॉल से-ऊधो यह मुर्दों का देश
“ “ कवि बोधिसत्व बनारस को ही मुर्दों का टीला कह रहे थे । इस देश ने कब बगावत की ? और जिन्होंने की उनका साथ देने वाले मुट्ठी भर न थे । 1857 की अमर कहानी गाते रहो पर तब भी साथ नहीं दिया , करोडों की आबादी में महज़ कुछ हजार पूरे देश…

