सत्ता से चूके अनूप की मंगोडा पार्टी में ठहाकों की गूंज चुनाव की बिसात पर खेत रहे अटल जी के भानजे का होगा वनवास खत्म?

ग्वालियर । सत्ता की हनक की ढलान पर बैठे अनूप मिश्रा फिर एक बार मंगौड़ा पार्टी से चर्चा में हैं।  अनूप मिश्रा लंबे अर्से   बाद एक नये हिन्दी न्यूज चैनल के इन्टरव्यू प्रसारित करने के बाद चर्चा में आये । शनिवार को अनूप मिश्रा की  नव वर्ष की मंगौडा पार्टी   में  भास्कर, पत्रिका, नईदुनिया , राज एक्सप्रेस पीपुल्स समाचार सहित सांध्य दैनिक से लेकर फेस बुक इंस्टा पर पत्रकारिता के जोहर दिखा रहे कलमकार शामिल हुए ।

अनूप मिश्रा की पार्टी में शामिल पत्रकारों के  मश्तिष्क में  चटपाटे मंगौड़े के  स्वाद के साथ साथ एक  सवाल रह रह कर दस्तक दे रहा था कि क्या अनूप एक बार फिर 2028 के चुनावी दंगल में  उतरने को उतावले हैं।  लेकिन सवाल का सही जबाब तो देश और प्रदेश की सत्ता सूत्र संभाल रही  जोड़ी या ग्वालियर चंबल अंचल की शक्तिशाली भाजपा क्षत्रप केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिंया ही दे सकते हैं।

आपको  जानकारी के लिये बता दें कि  अनूप मिश्रा की  फितरत  हर विधान सभा चुनाव में चुनाव क्षेत्र बदलने की रही है। इसी चस्के ने  अनूप मिश्रा की राजनीति पर समय से पहले विराम लगा दिया । पूर्व प्रधानमंत्री  स्व अटल बिहार वाजपेयी के एकमात्र राजनैतिक वारिस  को भाजपा की राजनीति काबिज गुजराती जोड़ी 2018 के विधान सभा चुनाव में  उनके क्षेत्र बदलने की मंशा को नकार कर  टिकिट दिया मगर बोरियां बिस्तर बांधने का पक्का इंतजाम भी कर दिया था । नतीजा कांग्रेस के उम्मीदवार लाखन सिंह यादव के हाथों शिकस्त खानी पड़ी।

पूर्व मंत्री और पूर्व प्रधान मंत्री स्व. अटल जी के भानजे 1990 मेंभाजपा के टिकिट पर  ग्वालियर की गिर्द विधानसभा सीट से कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे बालेन्दु शुक्ला  को हराकर चर्चा  में आये थे । हालांकि उन्हे प्रदेश में सत्तासीन हुई भाजपा जनतादल की सरकार में शामिल नही किया गया । लेकिन भाजपा के दिग्गज नेता स्वर्गीय अटलजी के भानजे होने के चलते सत्ता के गलियार अच्छी खासी पूंछ परख रही। 1993 के विधान सभा चुनाव में वे दूसरी बार गिर्द से विधायक बने । 1998 के विधान सभा चुनाव में उन्होने चुनाव क्षेत्र बदलकर तत्कालीन ग्वालियर दक्षिण विधान सभा से चुनाव लड़ा हालांकि अनूप मिश्रा कांग्रेस सरकार में मंत्री और अंचल के कांग्रेसी हैवीवेट भगवान सिंह यादव को चुनाव में हराकर तीसरी बार विधान सभा में पंहुचे। दिल्ली की सत्ता की चाबी मामा अटलजी के हाथ होने का फायदा उठाते हुए फिर से 2003 के विधानसभा चुनाव नये विधान सभा क्षेत्र लश्कर पूर्व से चुनाव मैदान में उतरे । कांग्रेस के विधायक रमेश अग्रवाल को हराकर चौथी बार विधानसभा चुनाव जीतकर उमाभारती के नेतृत्व में बनी भाजपा सरकार में जलसंसाधन विभाग स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री बने । चर्चा में रहने के आदि अनूप ने उमाभारती के स्तीफे के बाद भरपूर कोशिश की थी कि मामा अटल के रहते मुख्यमंत्री का ता उनके सर पर सजे लेकिन संघ की आनाकानी के चलते  सह संभव  ना हो  सका । अनूप मनमसोस कर रह गये पहले बाबूलाल गौर फिर शिवराज सिंह चौहान की केबीनेट मंत्री ही बन सके । यही नही 2008 के विधान सभा चुनाव में  भितरवार विधान सभा क्षेत्र से कांग्रेस के उम्मीदवार लाखन सिंह के हाथों करारी पराजय हुई। चुनाव हारने के बाद उन्होने ब्राह्मण बहुल लोकसभा सीट मुरैना सीट से भाजपा के प्रत्याशी बने औरचुनाव में जीतकर पहली बार सांसद बने। लेकिन क्षेत्र बदलने के आदी ने अनूप एकबार फिर  राज्यसरकार में मंत्री बनने की लालसा में 2018 के विधानसभा चुनाव में  भितरवार सीट जोर अजमाइश की लेकिन कांग्रेस के दो बार के  विधायक लाखनसिंहयादव के हाथों करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। लगातार क्षेत्र बदलने के आदी अनूप को भाजपा ने 2023 के विधान सभा चुनाव में टिकिट देना ही मुनासिब ही नहीं समझा।

अनूप मिश्रा की मंगौड़ा पार्टी में ग्वालियर दक्षिण की विधान सभा चुनाव लड़ने का शिगूफा भले ही चली हो लेकिन अब ना उम्र साथ रही ना संगठन में हनक । यही नहीं 2028 के विधान सभा चुनाव की बेला आते आते अनूप मिश्रा 75 पार कर चुके होंगे। अगर 75 की उम्र का बंधन आड़े नहीं भी आया तो टिकिट की दौड़ में  2003 से लगातार विधानसभा चुनाव जीत रहे  केबीनेट मंत्री नारायण सिंह कुश्वाह से कड़ी चनौती मिलेना तय है।