ग्वालियर । नगर निगम ग्वालियर ने सोमवार को निर्णय लिया है कि वर्षों से लंबित सेवाकर और संपत्ति कर चुकाने में आनाकानी कर रहे केन्द्र सरकार , राज्य सरकार के विभागों की शासकीय संपत्तियों से सेवा कर (उपभोक्ता प्रभार) एवं निजी संस्थानों बड़े व्यक्तिगत बकाया दारों से सम्पत्तिकर वसूली के लिये अब कोर्ट की शरण में जायेगी । नगर निगम ग्वालियर संबधित विशेष न्यायाधीशों के समक्ष परिवाद प्रस्तुत कर वसूली की गुहार लगायेगी।
नोडल अधिकारी विधि श्री अनूप लिटोरिया ने जोहार देस डिजीटल को बताया कि नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय के आदेशानुसार म.प्र.शासन, नगरीय विकास एवं आवास विभाग, मंत्रालय के दिए गए निर्देश एवं म.प्र. नगर पालिक निगम अधिनियम की धारा 132 (ए) एवं माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश दिनांक 19.11.2009 के पालन में केन्द्र शासन एवं राज्य शासन की शासकीय संपत्तियों से सेवा कर (उपभोक्ता प्रभार) एवं अन्य कर वसूली की कार्यवाही की जानी है। इस संबंध में संबंधित शासकीय संस्थानों एवं विभागों को नगर पालिक अधिनियम 1956 की धारा 173 के अंतर्गत नोटिस जारी किये गये हैं, किन्तु उनके द्वारा निगम में सेवा कर एवं अन्य कर की राशि जमा नहीं करायी गयी है।
अतः उपरोक्तानुसार निगम राजस्व हित में संबंधित शासकीय संस्थानों एवं विभागों से सेवा कर (उपभोक्ता प्रभार) एवं अन्य कर तथा अन्य संस्थानोंध्विभागोंध्व्यक्तियों से सम्पत्तिकर एवं अन्य कर की प्रभावी वसूली की कार्यवाही हेतु माननीय विशेष न्यायाधीश, नगर निगम ग्वालियर, जिला न्यायालय ग्वालियर के समक्ष धारा 173 सहपठित धारा 396, 440 एवं अन्य सुसंगत प्रावधानों अंतर्गत परिवाद प्रस्तुत करने हेतु, नगर निगम आयुक्त श्री संघ प्रिय द्वारा धारा 69 (4) प्रावधानों के अंतर्गत संबंधित विधानसभा के उपायुक्त सम्पत्तिकर (पदेन) को शक्तियां प्रत्यायोजित कर अधिकृत किया है। संबंधित विधानसभा के उपायुक्त सम्पत्तिकर नियमानुसार माननीय विशेष न्यायाधीश, नगर निगम ग्वालियर, जिला न्यायालय ग्वालियर के समक्ष परिवाद प्रस्तुत करना सुनिश्चित करेंगे।
नोडल अधिकारी विधि श्री अनूप लिटोरिया ने जोहार देस डिजीटल को बताया कि नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय के आदेशानुसार म.प्र.शासन, नगरीय विकास एवं आवास विभाग, मंत्रालय के दिए गए निर्देश एवं म.प्र. नगर पालिक निगम अधिनियम की धारा 132 (ए) एवं माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश दिनांक 19.11.2009 के पालन में केन्द्र शासन एवं राज्य शासन की शासकीय संपत्तियों से सेवा कर (उपभोक्ता प्रभार) एवं अन्य कर वसूली की कार्यवाही की जानी है। इस संबंध में संबंधित शासकीय संस्थानों एवं विभागों को नगर पालिक अधिनियम 1956 की धारा 173 के अंतर्गत नोटिस जारी किये गये हैं, किन्तु उनके द्वारा निगम में सेवा कर एवं अन्य कर की राशि जमा नहीं करायी गयी है।
अतः उपरोक्तानुसार निगम राजस्व हित में संबंधित शासकीय संस्थानों एवं विभागों से सेवा कर (उपभोक्ता प्रभार) एवं अन्य कर तथा अन्य संस्थानोंध्विभागोंध्व्यक्तियों से सम्पत्तिकर एवं अन्य कर की प्रभावी वसूली की कार्यवाही हेतु माननीय विशेष न्यायाधीश, नगर निगम ग्वालियर, जिला न्यायालय ग्वालियर के समक्ष धारा 173 सहपठित धारा 396, 440 एवं अन्य सुसंगत प्रावधानों अंतर्गत परिवाद प्रस्तुत करने हेतु, नगर निगम आयुक्त श्री संघ प्रिय द्वारा धारा 69 (4) प्रावधानों के अंतर्गत संबंधित विधानसभा के उपायुक्त सम्पत्तिकर (पदेन) को शक्तियां प्रत्यायोजित कर अधिकृत किया है। संबंधित विधानसभा के उपायुक्त सम्पत्तिकर नियमानुसार माननीय विशेष न्यायाधीश, नगर निगम ग्वालियर, जिला न्यायालय ग्वालियर के समक्ष परिवाद प्रस्तुत करना सुनिश्चित करेंगे।

