अख़बारों में छपने वाले मृत्यु सूचना संदेश,लफ़्फ़ाज़ियाँ में विश्वगुरु की ओर पहला कदम

मुकेश नेमा की फेसबुक वॉल से साभार

अख़बारों में छपने वाले मृत्यु सूचना संदेशों को पढ़िए। इन्हें पढ़ते ही साफ भरोसा हो जाता है कि पूरी दुनिया में झूठ बोलने और लफ़्फ़ाज़ियाँ करने मे हमारा कोई मुक़ाबला नही। यदि हम विश्व गुरु हैं तो बस इसी मामले मे और इस मैदान में दूसरे सब हमसे मीलों पीछे है। ऐसे सफेद झकाझक झूठ बोलते हैं हम कि अकल के अंधों की भी तत्काल समझ मे आ जाए कि जो सुना है उसे गंभीरता से लेना क़तई जरूरी नही। हमारी तरफ से छपवाए गए मृत्यु संदेश इसकी तस्दीक करते है।
हमारे देश मे मरते ही हर आदमी संत हो जाता है। मरने के अगले दिन अख़बारों मे छपने वाली इन सूचनाओं मे उसे ऐसी ऐसी उपमाओं से नवाज़ा जाता है कि यमदूत के भैंसे पर चढ़ने के लिए उद्धत उसकी आत्मा को भी झेंप महसूस होने लगे। आपका जीवन हमारी प्रेरणा था। आप एक मार्गदर्शक ग्रंथ थे जिसके हर पन्ने मे करूणा,दया ,ममता,कूट कूट कर भरी थी। आप न भूतो थे न भविष्यति। आप हर पल हर क्षण याद आऐंगें। हमारी आँखें आश्रुपूरित हैं। ऐसी ऐसी बातें लिखी होती है इन सूचनाओं मे कि मरने वाले के यार दोस्त यह तय नही कर पाते कि रोना है या हँसना है।
ऐसी निरीह औलादें जो बाप से जीवन भर कूटी जाती रही हो। ऐसे दुष्ट लड़के जिन्होंने जीते जी बाप को लतियाया हो ,वो सभी अपने बाप को मरते ही फौरन आदरणीय घोषित कर देते है। मरने वाला यदि कायदे का खाता पीता बाप हो तो ऐसी आरती उतारी जाती है कि मत पूछिए। मन होता है उनकी औलादों से पूछ ही लिया जाए कि यार तुम्हारा बाप यदि इतना ही महान था तो ये बात उसके जीते जी न उसे पता चली न हमें ,न जगज़ाहिर हुई। ऐसा कैसे हुआ ? ऐसी खबर से मरने वाले के पड़ोसी भी ताज्जुब में पड़ जाते है कि गुप्ता जी इतनी सारी अच्छाईयों के साथ चुपचाप मर गए और दीवार से दीवार लगी होने के बावजूद हमें कानों कान खबर नही हुई।
ऐसी मृत्यु सूचनाओं को पढ़ कर मुझे ये वहम होता है कि मरने वाले की औलादें राहत महसूस कर रही है। लड़का शोक सूचना इसलिए छपवा रहा है कि सभी जान जाएं कि हमारे बाप मर चुके और अब हम ख़ुदमुख़्तार है। और यह भी कि अब उनके पास बाप के दिए गए सारे उधारों को वसूल करने का पूरा हक है।
मरने वाले के मर जाने बाबत सूचना अखबार के कितने कॉलम घेरेगी ये बात उसकी छोड़ी गईं जायदाद पर निर्भर करती है। यदि मरहूम कायदे की जमीनें दुकानें बैंक बैलेंस छोड़ गए हो तो औलादें लोकल अखबार के एकाध पेज का खर्च सहर्ष उठा ले जाती है। अम्मा के मरने बाबत सूचनाएं कुछ ऐसे शुरू होती है कि फलाने जी की पत्नी,अलाने जी अम्मा,ढिमके जी की सास ,इनकी उनकी दादी अमुक जी का श्री लोक गमन कल रात हो गया है। मरने वाली का इतने आखरी मे ,नामों के झुरमुट के बीच होता है कि एकाएक समझना मुश्किल होता है कि मरा कौन है।
मृत्यु सूचनाएँ मुंडन टाईप का वो संस्कार है जिसे औलादें मन ही मन भुनभुनाते हुए पूरा करती है। ऐसे संदेश इसलिए भी छपवाए जाते है ताकि कंधा देने वालो ,श्मशान में श्रद्धांजलि भाषण देने वालो का जुगाड़ हो जाए।
ये मृत्यु सूचनाएं इतनी नेक ,संस्कारवान और सुशील होती है कि साफ लगता है कि ऐसा कोई लिख्खाड मरने वाले के वारिस के संपर्क मे है जो शादी के कार्ड का ब्यौरा और शोक संदेश लिखने मे एक जैसा माहिर है।
ये सारी लिखा पढ़ी बस इसलिए क्योंकि मैं फुरसत मे था। बहुत जल्द और फुरसत मे होने वाला हूँ। कभी भी ,कुछ भी लिखने मे उस्ताद हूँ ,खुद ज्यादा जीने की उम्मीद करता हूँ। ऐसे में इस बाबत कुछ भी लिखवाना हो तो बेझिझक संपर्क करे। आपकी मदद करने मे मुझे खुशी होगी।

मुकेश नेमा की फेसबुक वॉल से