शूद्र का आटा, शूद्र का घी,भोग लगावे पंडित जी
शूद्र का आटा, शूद्र का घी, भोग लगाएं पंडित जी… शूद्र बेचारे दान चढावैं, मौज मनावैं पंडित जी.. पैदा हो जब शूद्र के बेटा, नाम धरावैं पंडित जी… आरक्षण से मिलल, नौकरी, मनौती पुरावैं पंडित जी.. खेत बेंच मन्दिर बनवावैं, पुजारी बनिगैं पंडित जी.. . शूद्रन के चपरासी बनवावैं, हाकिम बनिगै पन्डित जी… कर्जा लेके…

