यूजीसी नियमों का मामला सुप्रीम कोर्ट के आंगन में जल्द होगी सुनवाई

यूजीसी के इक्विटी प्रमोशन नियमों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है। यह याचिका जनहित के मुद्दों पर  याचिका दाखिल करने वाले वकील विनीत जिंदल ने दाखिल की है । याचिका में कहा है कि यूजीसी के नियम एससी एसटी और ओबीसी के अलावा बाकी वर्गों के लोगों को शिकायत दर्ज करने और संस्थागत सुरक्षा का अधिकार नहीं देते। याचिका में यह भी कहा गया है की जाति के आधार पर भेदभाव सहने वाले हर व्यक्ति को सुरक्षा मिलना चाहिए । वह किसी भी जाति या समुदाय से क्यों ना हो

याचिका के मुताबिक जाति के आधार पर किया गया कोई भी भेदभाव संविधान के अनुच्छेद 14,15 और 21 के तहत दिए गए मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। आपको बता दें कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने 13 जनवरी 2026 को प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टिट्यूट रेगुलेशन 2026 नाम से नए नियम लागू किए हैं। जिनका लक्ष्य कॉलेज और विश्वविद्यालय में जातिगत भेदभाव रोकना है । इन नियमों के तहत शिक्षण संस्थानों को ईश्वर अपॉरच्यूनिटीनिटी सेन्टर, इक्विटी कमेटी, 24 एक 7 हेल्पलाइन और इक्विटी स्क्वाड जैसी व्यवस्थाएं बनाने की बात की गई है। ताकि भेदभाव की शिकायतें जल्द से जल्द दूर की जा सकें। नए नियम की वजह से सोशल मीडिया पर भारी बहस जारी रही है। खासकर सामान्य वर्ग के छात्रों और कुछ संगठनों का मानना है कि नियम निर्धारित जाति वर्गों के अलावा बाकी लोगों के अधिकारों की रक्षा में कमी होगी। वहीं झूठी शिकायतों का डर बढ़ने का खतरा है।
इस असहमति के बीच एक जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई है, जिसमें कहा गया है। कि नियमों के कुछ प्रावधान समानता,अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत आजादी जैसे मौलिक अधिकारों के खिलाफ है । इसलिए उनकी वैधता की जांच होना चाहिए।