नईदिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रणय रॉय और राधिका रॉय के खिलाफ 2016 में जारी किए गए आयकर पुनर्निर्धारण नोटिस को रद्द कर दिया है। दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच के जस्टिस दिनेश मेहता और विनोद कुमार का यह फैसला सोमवार को आया, जिसमें कोर्ट ने आयकर विभाग पर 2 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यह मामला एनडीटीवी के प्रमोटर आरआरपीआर होल्डिग प्रायवेट लिमिटेड से जुड़े कुछ लेन-देन से संबंधित था।
प्रणय रॉय और राधिका रॉय एनडीटीवी (न्यू दिल्ली टेलीविजन लिमिटेड) के संस्थापक हैं। आरआरपीआर होल्डिग प्रायवेट लिमिटेड कंपनी की न्यू दिल्ली टेलीविजन प्रमोटर कंपनी है, जिसमें रॉय दंपति की प्रमुख हिस्सेदारी है।
इस मामले की जड़ 2009-10 के आयकर निर्धारण वर्ष से जुड़ी है, जब आयकर विभाग ने को दिए गए कुछ ब्याज-मुक्त ऋण को लेकर जांच की थी। विभाग का आरोप था कि इन लेन-देन में आय को छिपाया गया था और इससे संबंधित कर चुकाया जाना चाहिए था। पहले दौर में इन लेन-देन की जांच हो चुकी थी और मूल्यांकन पूरा हो गया था।
मोदी सरकार के केंद्रीय सत्ता में आने के बाद 2016 में मार्च महीने में आयकर विभाग ने फिर से पुनर्निर्धारण नोटिस जारी किए, जिसमें इन्ही लेन-देन को दोबारा खोलने की कोशिश की गई। प्रणय रॉय और राधिका रॉय ने इसे चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी (2017 में)। उनका मुख्य तर्क था कि यह कानून के खिलाफ है, क्योंकि एक ही तथ्य और सामग्री पर मूल्यांकन को दूसरी बार दोबारा खोलने की अनुमति नहीं है।
दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच (जस्टिस दिनेश मेहता और विनोद कुमार) ने याचिका स्वीकार कर ली। कोर्ट ने माना कि:
• 2016 के नोटिस कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं थे।
• यह पहले पूर्ण हुए निर्धारण को अनुचित तरीके से दोबारा खोलने की कोशिश थी।
• सभी संबंधित आगे की कार्यवाही भी रद्द कर दी गई।
कोर्ट ने आयकर विभाग की कार्यशैली पर टिप्पणी करते हुए 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया, जिसमें से 1 लाख रुपये प्रणय रॉय और 1 लाख रुपये राधिका रॉय को देने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि यह राशि प्रतीकात्मक है, क्योंकि वास्तविक मुआवजा इससे ज्यादा हो सकता था, लेकिन विभाग की गलती के लिए यह जरूरी था।
यह फैसला के संस्थापकों के लिए बड़ी राहत है, जो लंबे समय से विभिन्न जांचों और कानूनी मामलों का सामना कर रहे थे। दरअसल उन्हें ऐसी ही दूसरी ऐजेंसियों की कार्रवाई के दबाव में न्यू दिल्ली टेलीविजन को अड़ानी ग्रुप के हाथ बेचना पड़ा था । विस्तृत फैसले का इंतजार है, लेकिन तत्काल प्रभाव से ये नोटिस और कार्यवाही खत्म हो गई हैं।

