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ईरानी समर्थक मुस्लिम अप्पियों, खालाओं और कौमी चच्चाओं को धन्यवाद हमारे चूल्हे जलाने का

धन्यवाद कीजिए उन मुस्लिम अप्पियों, खालाओं और कौमी चच्चाओं को जो भारत में ईरान के समर्थन में उतरे थे, और जो ट्रम्प की सेना से लोहा लेने ईरान जाने को भी तैयार थे।उनका देश में ट्रैफिक जाम करना, ईरान को ही अपना सब कुछ घोषित कर देना भी गलत था। जिसका हमने कड़ा विरोध किया था। मेरा मानना है कि आप जहाँ का खाते हैं, उस मुल्क के कायदे कानून मत तोड़िये। मगर वो जो ईरान समर्थन का सैलाब उमड़ा था आज उसका खांटी रंग देखने को मिल रहा है।
ईरान के विदेश मंत्री ने साफ कहा है कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पूरी दुनिया के लिए बंद नहीं है, बल्कि सिर्फ अमेरिका और इस्राइल जैसे “दुश्मन देशों” के जहाजों पर रोक है। भारत के जहाजों को गुजरने दिया जा रहा है।
भारत के तेल और गैस लदे जहाज, तेल टैंकर सुरक्षित निकल पा रहे हैं।
कई लोग इसे मोदी सरकार की कूटनीति बता रहे हैं। कूटनीति का हिस्सा जरूर होगा, मगर उड़ती चिड़िया के पर गिनने वाले हम लोग जानते हैं कि मोदी सरकार को ईरान कितना भाव दे रहा है। उनके विदेश मंत्री ने उनका नाम तक नहीं लिया। वो सिर्फ आम भारतीय समर्थन की बात कर रहे हैं।
जो भी हो, अगर हॉर्मुज़ बंद हो जाता तो भारत में गैस, पेट्रोल और तेल का संकट खड़ा हो सकता था।
इसलिए आज अगर हमारे यहाँ आम आदमी के घर का गैस चूल्हा जल रहा है तो इसमें कई कारण हैं — हल्की सी कूटनीति भी, ईरान से पुराने रिश्ते भी, और दुनिया की राजनीति भी। और सबसे महत्वपूर्ण ये भारतीय मुस्लिम भीड़, मौन ईरानी समर्थक, जिसको देख ईरान गदगद है। 👽
हमारे आधे देश की आबादी सिलेंडर के लिए लाइन में लगी है। सोचो अगर ईरान पूरी तरह से आपको दुश्मन घोषित कर देता तो क्या हाहाकार मचेगा। अमेरिका इस्राइल सक्षम हैं। वो झेल जाएंगे हर चोट। मगर हम अभी उतने समर्थ नहीं है।
मैं शुरू से कहता आ रहा हूँ कि गुंडे ट्रंप को खुश करने के लिए किसी भी धड़े में शामिल होना अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारना है। ईरान हमारा दुश्मन मुल्क नहीं था।
औ फर्ज़ी विश्वगुरु का तमगा भी तब तक ही सही लगता है जब आप स्वयं के संसाधनों में समर्थ हों।
एक बार भारत के ईरान समर्थकों का दिल से शुक्रिया अदा कीजिये। जो आज हम तेल संकट से काफी हद तक महफूज़ हैं।
धन्यवाद अप्पी, धन्यवाद खाला।
 लेखक मुकेश जोशी