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(वरिष्ठ पत्रकार अनिल जैन )
अभी-अभी विश्वस्त सूत्रों ने खबर दी है अमेरिका ने भारत के लोगों को लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाने की इज़ाजत दे दी है। सूत्रों ने अमेरिकी प्रशासन के इस फैसले को मोदी सरकार के कूटनीतिक प्रयासों का परिणाम बताते हुए कहा है कि इससे भारत को आत्मनिर्भर बनाने का प्रधानमंत्री मो’दी का संकल्प मजबूत होगा।
ईरान पर इजराइल और अमेरिका के हमले के बाद पिछले दो सप्ताह में अमेरिका से भारत को मिली यह दूसरी बड़ी राहत है। इससे पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत को रूस से क्रूड आइल खरीदने के लिए भी हरी झंडी दी थी।
आपको बता दें कि देश में रसोई गैस का संकट पैदा होने के बाद से विदेश मंत्री जयकंकर इस सिलसिले में अमेरिकी प्रशासन से लगातार संपर्क बनाए हुए थे और खुद प्रधानमंत्री मो’दी ने भी तीन बार राष्ट्रपति ट्रंप से फोन पर बात की थी।
समझा जा रहा है कि अमेरिका के इस फैसले से चीन और और रूस को गहरा झटका लगा है और इधर भारत में विपक्षी दल भी हक्का बक्का रह गए हैं। वे समझ नहीं पा रहे हैं कि इस पर क्या प्रतिक्रिया दी जाए।
दूसरी ओर आरएसएस के मुखिया मोहन राव भागवत ने अमेरिकी प्रशासन से भारत को मिली इस राहत को सनातन संस्कृति की जीत बताते हुए कहा है कि यह हिंदुओं के जागने और संगठित होने का ही परिणाम कि भारत के पक्ष में अमेरिका को फैसला लेने के लिए बाध्य होना पड़ रहा है। भागवत ने कहा कि लकड़ी के चूल्हे पर भोजन बनाना अपनी जड़ों की ओर लौटना है। भारत को विश्व गुरु बनने के लिए इसी तरह अपनी जड़ों की ओर लौटना होगा।
भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने अमेरिका से मिली इस अनुमति को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह मो’दी जी के मजबूत और दूरदर्शी नेतृत्व का ही परिणाम है कि अमेरिका को भारत सरकार अनुरोध मानना पड़ रहा है। अब अगर इस पर कांग्रेसी, वामपंथी, समाजवादी आदि देशविरोधी ताकतें छाती पीटती हैं तो पीटती रहे, उनका कोई कुछ नहीं कर सकता। ऐसे लोगों को पाकिस्तान या ईरान चले जाना चाहिए।
हालांकि अभी यह जानकारी नहीं मिली है कि अमेरिका ने भारत को लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाने की अनुमति किन शर्तों पर और कितने वक़्त के लिए दी है। इस बारे विस्तृत जानकारी मिलते ही हम फिर हाज़िर होंगे।
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